Kailash Mansarovar Yatra by Helicopter from Lucknow This is designed especially for pilgrims who wish to avoid long treks and high physical strain, this helicopter route completes the yatra in a short span while ensuring maximum comfort.
This 5–9 day journey (depending on weather permissions and flight connections) lets you witness the Himalayan valleys, take part in rituals and enjoy the serenity of the most holy and pious pilgrimage in the world.
लखनऊ पहुंचने के बाद होटल में स्थानांतरण। रात्रि भोजन तथा रात्रि विश्राम दोनों होटल में। रात्रिभोजन होटल
सुबह नाश्ता करने के बाद, हम नेपालगंज जाने के लिए एसी कोच में लगभग 4-5 घंटे का सफर तय करेंगे। शाम होते ही यात्रा ब्रीफिंग करेंगे। रात्रि में नेपालगंज में होटल सिग्नेट या होटल सिद्धार्थ में विश्राम करेंगे। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रिभोज दर्शनीय स्थल परिवहन होटल
सुबह जल्दी उठें हवाई अड्डे के लिए स्थानांतरण तथा सिमिकोट जाने के लिए उड़ान भरें, सिमिकोट में कुछ घंटे रुक कर विश्राम करें। फिर उसके बाद हेलीकॉप्टर से हिलसा की ओर जाने लिए उड़ान भरें, अपने समूह के अन्य सदस्यों लिए प्रतिक्षा करें और फिर पुरंग के लिए गाड़ी पकड़े। रात्रि में होटल हिमालय या होटल पुरंग या फिर इसी तरीके के किसी होटल में ठहरें। नेपालगंज से सिमिकोट तक की उड़ान भरें जिसमें लगभग 40-50 मिनट लगेंगे, उसके बाद सिमिकोट से हिलसा तक हेलीकॉप्टर से जाएं जिसमें 10-20 मिनट लगेगें। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रिभोज हवाई यात्रा दर्शनीय स्थल परिवहन ठहरना
पहले दिन आप मौसम के अनुकूल हो जाएंगे फिर इसके बाद आप कैलाश पर्वत परिक्रमा की तैयारी के लिए एक छोटी सी ट्रेकिंग पर जा सकते हैं। रात में ठहरने के लिए होटल हिमालय या होटल पुरंग या फिर इसी तरह के किसी होटल में रुकें। पुरंग एक छोटा शहर के साथ साथ अत्यधिक साफ सुथरा शहर भी है जहां से आगे की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ज़रूरी सामान बेचने वाली कई दुकानें भी मौजूद है। आप इन दुकानों से ट्रेकिंग स्टिक, मानसरोवर झील का पवित्र जल रखने के लिए पानी के गैलन, थोड़ा पैक्ड जूस एवं अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं। अगर आपको मोलभाव करने में दिलचस्पी है तो ये बेहतर जगह है क्योंकि यहां लगभग हर दुकान में मोलभाव करने की सुविधा उपलब्ध है। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रिभोज दर्शनीय स्थल परिवहन होटल
लग्जरी एसी वॉल्वो श्रेणी वाली बस से मानसरोवर झील तक लगभग आप 2 घंटे लगातार ड्राइव करेंगे, उसके बाद मानसरोवर झील की परिक्रमा करने के लिए आगे बढ़ते चले। तकरीबन 105 किमी की पवित्र झील की परिक्रमा को पूर्ण करें। दिव्य मानसरोवर झील में डुबकी लगाने के बाद पूजा अर्चना करें। मानसरोवर झील पर आते वक्त आपको पवित्र कैलाश पर्वत की पहली झलक मिलेगी, जो कि दिव्य कैलाश पर्वत के दर्शन का एक अद्भूत अनुभव है। रात्रि विश्राम के लिए मानसरोवर झील के पास गेस्ट हाउस में रुकें। अगर मौसम अनुकूल रहा, तो फिर आप पवित्र स्थान की दिव्यता को देखने के लिए रात या फिर सुबह (ब्रह्म मुहूर्त) में मानसरोवर झील की यात्रा कर सकते हैं । नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रिभोज दर्शनीय स्थल परिवहन होटल स्थानांतरण
मानसरोवर से कुछ दूर ड्राइव करने के बाद, आप दारचेन पहुंच जाएंगे जिसे कैलाश परिक्रमा तथा अष्टपद दर्शन का भी आधार माना जाता है। आप अष्टपद तभी जा सकेंगे यदि हमें वहां के चीनी अधिकारियों से अनुमति मिल जाएगी। रात्रि में विश्राम के लिए होटल हिमालय में ठहरेंगे। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रि का भोजन दर्शनीय स्थल ठहरना
पवित्र कैलाश पर्वत की परिक्रमा के पहले दिन आप जल्दी उठे और यमद्वार तक की ड्राइव करें। यमद्वार पहुंच जाने के बाद आप अपनी परिक्रमा शुरू करें जिसमें 10 किमी की पैदल यात्रा भी शामिल है। पहले दिन की परिक्रमा से कैलाश पर्वत के उतरी मुख का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त करें। जो लोग परिक्रमा नहीं करेंगे वो यमद्वार से दारचेन की ओर आगे बढ़ेंगे, जो सिर्फ 30 मिनट की दूरी पर स्थित है और वहां के एक गेस्ट हाउस में 2 रात बिताएंगे तथा दारचेन से कैलाश पर्वत के परिदृश्यों का आनंद लेंगे। **परिक्रमा वैकल्पिक है। कुछ लोग घोड़े से, कुछ लोग पैदल तथा कुछ वृद्ध होने के कारण परिक्रमा नहीं कर रहे होंगे। जो सदस्य परिक्रमा नहीं कर रहे होंगे, वे यमद्वार से होते हुए दारचेन स्थित गेस्ट हाउस में लौट जायेंगे। हम वहाँ भोजन एवं रहने के लिए आवास की व्यवस्था करेंगे। वहां से देखने पर कैलाश पर्वत अत्यंत सरलता से दिखता है तथा वहां पूजा अर्चना भी की जा सकती है। दारचेन में ठहरे लोग परिक्रमा का तीसरा दिन पूर्ण करके पहले भाग वाले समूह के सदस्यों के साथ शामिल होंगे। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रि का भोजन दर्शनीय स्थल ठहरना
पवित्र कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने के लिए दूसरे दिन सुबह जल्दी उठें तथा दिरापुक से होते हुए डोलमा ला दर्रे और फिर ज़ुथुलपुक तक 22 किमी की अपनी यात्रा आरंभ कर रहे होंगे। इसे कैलाश पर्वत की यात्रा का अत्यधिक कठिन हिस्सा भी माना जाता है क्योंकि आप समुद्र तल से करीब 18,600 फीट की ऊंचाई तक ट्रेकिंग कर रहे होंगे। डोलमा ला दर्रे से गौरी कुंड तक उतरें तथा नदी के किनारे ज़ुथुलपुक तक आगे बढ़ते रहें। रात्रि को ठहरने के लिए लॉज या फिर गेस्ट हाउस में रुकें। दूसरे दिन के पहले 6-7 किमी (5600 मीटर पर डोलमा ला दर्रे तक) अत्यधिक खड़ी वा ऊंची चढ़ाई है जो कि यात्रा का सबसे कठिन हिस्सा है। यात्रियों को यह सलाह दी जाती है कि वे इस चढ़ाई को आराम से पूरा करें और जहां भी जरूरत महसूस हो वहां आराम करें। पहले 6-7 किमी के बाद, बाकी के 16 किमी अपेक्षाकृत समतल/ नीचे की ओर, और ज्यादा आरामदायक होते हैं। महत्वपूर्ण: परिक्रमा (दूसरा दिन) आप शिवस्थल (जो कि तिब्बतियों के लिए एक बेहद ही पवित्र स्थान माना गया है तथा ऐसा भी माना जाता है कि यहाँ जो कुछ भी आप अर्पित करते हैं, वह आपको स्वर्ग में वापस मिलता है) एवं गौरी कुंड से गुज़रेंगे। डोलमा ला दर्रे के बाद नदी के तट पर एक लंबा, सुखद ट्रेकिंग मार्ग भी है। यहां आपको पवित्र कैलाश पर्वत का पूर्वी मुख दिखाई पड़ेगा। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रि का भोजन दर्शनीय स्थल ठहरना
परिक्रमा के तीसरे दिन लगभग 8 किमी का ट्रेक शामिल है जिसे पूर्ण करने में आपको लगभग 3 घंटे का समय लग सकता है। आमतौर पर ये ट्रेक सुबह के 9:00 से 10:00 बजे तक पूर्ण हो जाता है। इस छोटे ट्रेक के बाद आप, दारचेन से होते हुए पुरंग तक की ड्राइव करेंगे। रात्रि विश्राम के लिए होटल हिमालय या होटल पुरंग में ठहरें। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रि का भोजन दर्शनीय स्थल ठहरना
लक्जरी एसी वाहन से हिलसा तक की ड्राइव करें, हेलीकॉप्टर से सिमिकोट की ओर वापस जाएं, फिर फ्लाइट से उड़ान भरें और नेपालगंज जाएं तथा लखनऊ तक की ड्राइव करें। रात्रि को विश्राम करें डीलक्स होटल में। नाश्ता दोपहर का भोजन रात्रि का भोजन हवाई यात्रा दर्शनीय स्थल ठहरना
सुबह नाश्ते के बाद, भगवान शिव शंभू के आशीर्वाद के साथ आप अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें। नाश्ता
पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा
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